Thursday, 2 June 2011

काश! प्यार में भ्रष्टाचार के लिये भी कोई अन्ना हजारे होता

ये बात तब की हैं जब ‘LOL' का आविष्कार नही हुआ था, और लोग अमूमन मुस्कुरा कर ही काम चलाते थे । वास्तविक हँसी तो दूर किसी बीते दशक में ही छूट गई थी । कॉलेज के पहले प्यार की तरह।
नये जमाने के आदमी को देख कर बड़ा अफ़सोस होता हैं, और विश्वास करना कठिन हो जाता की हैं की ये वही हैं जो चांद छू आया हैं. और फिर हंसी आती है ये सोच कर - क्या मिला?
डॉ. किसन बाबूराव हजारे, के भ्रष्टाचार विरुद्ध अमरन अनशन पर बौद्धिक मुखौटे के साथ घंटों बहस कर सकता है, मगर उस एक कॉल के बाद किसी आंदोलन में कोई दिलचस्पी नही रहती, जो ईएमआई मिस होने पर बैंक से आती है
याद रखें, ये वही शहर है जो सिर्फ लाल बत्ती पर रुकता है.।
आम इंसान से लूटे गये सभी अधिकारों में 'प्यार करने का अधिकार' अब भी उसके पास है, और यही कारण है के प्रेम त्रिकोण में उसकी दिलचस्पी अब भी विधान सभा चुनावो से अधिक है । आखिर भूख - ग़रीब - प्रतिष्ठा एक प्रेम-त्रिकोण ही तो है। भूख से गरीब का संबंध सात फेरो से भी अधिक मजबूत होता है और प्रतिष्ठा तो ‘बाहरवाली’ है , जिसे वो छोड़ नही सकता । वह साहसी है, सरकारी वादे भूल गया है, लेकिन प्यार करना नहीं
काश! प्यार में भ्रष्टाचार के लिये भी कोई अन्ना हजारे होता.

3 comments:

  1. Lovely Bhai Jaan! But there are many who do not stop even at the traffic lights... LOL

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  2. वाह वाह वाह शानदार बधाई

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  3. Hain na..... 1 nahi kaafi hain, but wo Burger, Pizza, aur soft drinks ke saath unshan shuru karte hain.

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