काग़ज़, क़लम, दवात
ज़िन्दगी हसरत के सिवा कुछ नही, कुछ भी नही ये किया नही, वो हुआ नही, ये मिला नही, वो रहा नही।
Wednesday, 8 June 2011
मैं दुश्मनों से हाथ मिलाने में रह गया
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment