Saturday, 8 August 2015

हम्म

उदासी नहीं है अफसुर्दा सी शाम में किसी याद का पलकों पर लुढ़क आना, ज़र्द चेहरे पर मायूसी की लकीरों का बिखर जाना, उदासी नहीं है बालकनी पर खड़े हो कर गुज़रती गाड़ियों के नम्बर पढ़ना, या वॉलेट में रखी तस्वीर को बार-बार देखना, मुंतज़िर आंखो पर गिरते बालों को किसी का हटाना याद आना भी नहीं, उदासी तो है वक्त के वज़न से रेंगती घड़ी की सूंइयों को बेवजह घूरना, कामयाबी के बोझ से कंधों का झुक जाना, तुम्हारे किसी सवाल पर मेरा हौले से 'हम्म' करना

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