उसके जन्मदिन हमेशा वक़्त पर आते थे, किसी अजनबी की तरह, बिना इंतज़ार के. अपने दोस्तों पर उसे फक्र था ... मगर, लाल- पीले गुब्बारे कुछ देर बाद ही उदासी से मुंह लटका लेते और मोमबत्तियां के साथ पर उसे ज्यादा देर भरोसा नहीं था... अँधेरे की दोस्ती पर शक नहीं ... एहसासों से तलाकशुदा लफ्जों में, कहने वाले कहते थे - 'मुबारक हो' और वो किसी रिवाज़ की तरह मुस्कुराता था.. शायद कुछ अधूरा था ? एक एहसास, एक हँसी, शायद एक आंसू या शायद एक नाम ...जिसे वो केक की लिखावट में ढूंढता और सोचता था, की मोहब्बत भी अनदेखी जन्नत की तरह सुनी सुनाई बात है .. और फिर वो उस अजनबी के कंधे पर सर टिका देता, जैसे बसों में बैठे लोग नींद की झोंके में करते हैं ..
ज़िन्दगी हसरत के सिवा कुछ नही, कुछ भी नही ये किया नही, वो हुआ नही, ये मिला नही, वो रहा नही।
Thursday, 24 November 2011
वो केक की लिखावट में एक नाम ढूंढता था
उसके जन्मदिन हमेशा वक़्त पर आते थे, किसी अजनबी की तरह, बिना इंतज़ार के. अपने दोस्तों पर उसे फक्र था ... मगर, लाल- पीले गुब्बारे कुछ देर बाद ही उदासी से मुंह लटका लेते और मोमबत्तियां के साथ पर उसे ज्यादा देर भरोसा नहीं था... अँधेरे की दोस्ती पर शक नहीं ... एहसासों से तलाकशुदा लफ्जों में, कहने वाले कहते थे - 'मुबारक हो' और वो किसी रिवाज़ की तरह मुस्कुराता था.. शायद कुछ अधूरा था ? एक एहसास, एक हँसी, शायद एक आंसू या शायद एक नाम ...जिसे वो केक की लिखावट में ढूंढता और सोचता था, की मोहब्बत भी अनदेखी जन्नत की तरह सुनी सुनाई बात है .. और फिर वो उस अजनबी के कंधे पर सर टिका देता, जैसे बसों में बैठे लोग नींद की झोंके में करते हैं ..
आवाज़ के कारखाने..
आवाज़ के कारखाने, जो रात भर सजे रहते हैं,
उसी बेरूह शहर की निशानी है जो बेवजह जिंदा है.
मोहल्ले की किसी स्याह रात में,
सन्नाटे को चुनौती देती एक दरवाज़े पर दबी सी दस्तक
हाँ शायद, कोई बेटी लौटी है नींद बेच कर
सुबह के सूरज से अरसा हुआ मुलाक़ात हुए,
नहीं मालूम दीवारों से कैसे धूप उतरती है
वक़्त की कतरन पर ज़िन्दगी को सजाना आसान नहीं
जीने की मोहलत और मरने की फुर्सत से दूर,
इश्क से बातों का वक़्त बेसब्र गाड़ियों में ढूंढते कुछ लोग
इश्क उदास है और मोहब्बत मसरूफ
यह जानते हैं कानो को ढक कर
दुनिया से गाफिल होने का फन.
चमचमाती दुनिया में उदासी की सिसकी कौन सुने,
उजालो की रौनक में अंधेरो का हाल कौन पूछे
मोहब्बत इनकी जेबों में जिंदा है
मगर मैं जानता हूँ तुम्हारे होंठ कुछ भी कहें,
तुम्हारी आँखों की तरह यह शहर भी उदास है
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