उसके जन्मदिन हमेशा वक़्त पर आते थे, किसी अजनबी की तरह, बिना इंतज़ार के. अपने दोस्तों पर उसे फक्र था ... मगर, लाल- पीले गुब्बारे कुछ देर बाद ही उदासी से मुंह लटका लेते और मोमबत्तियां के साथ पर उसे ज्यादा देर भरोसा नहीं था... अँधेरे की दोस्ती पर शक नहीं ... एहसासों से तलाकशुदा लफ्जों में, कहने वाले कहते थे - 'मुबारक हो' और वो किसी रिवाज़ की तरह मुस्कुराता था.. शायद कुछ अधूरा था ? एक एहसास, एक हँसी, शायद एक आंसू या शायद एक नाम ...जिसे वो केक की लिखावट में ढूंढता और सोचता था, की मोहब्बत भी अनदेखी जन्नत की तरह सुनी सुनाई बात है .. और फिर वो उस अजनबी के कंधे पर सर टिका देता, जैसे बसों में बैठे लोग नींद की झोंके में करते हैं ..
ज़िन्दगी हसरत के सिवा कुछ नही, कुछ भी नही ये किया नही, वो हुआ नही, ये मिला नही, वो रहा नही।
Thursday, 24 November 2011
वो केक की लिखावट में एक नाम ढूंढता था
उसके जन्मदिन हमेशा वक़्त पर आते थे, किसी अजनबी की तरह, बिना इंतज़ार के. अपने दोस्तों पर उसे फक्र था ... मगर, लाल- पीले गुब्बारे कुछ देर बाद ही उदासी से मुंह लटका लेते और मोमबत्तियां के साथ पर उसे ज्यादा देर भरोसा नहीं था... अँधेरे की दोस्ती पर शक नहीं ... एहसासों से तलाकशुदा लफ्जों में, कहने वाले कहते थे - 'मुबारक हो' और वो किसी रिवाज़ की तरह मुस्कुराता था.. शायद कुछ अधूरा था ? एक एहसास, एक हँसी, शायद एक आंसू या शायद एक नाम ...जिसे वो केक की लिखावट में ढूंढता और सोचता था, की मोहब्बत भी अनदेखी जन्नत की तरह सुनी सुनाई बात है .. और फिर वो उस अजनबी के कंधे पर सर टिका देता, जैसे बसों में बैठे लोग नींद की झोंके में करते हैं ..
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