Wednesday, 10 August 2011

आरक्षण की सेंध


दलित-आरक्षण के हिमायती, यह जान लें की अमीर दलित भी उसी समाज का सच हैं, जहाँ दलितों को लेकर 'बेचारी' धारणा बना दी गयी है ! यकीन मान भी लीजिये की हम उस दौर में हैं, जहाँ न कोई  राजा है न कोई प्रजा - न कोई कांग्रेसी है न भाजपाई और न कोई दलित है न ब्रह्मण! समाज सिर्फ २ हिस्सों में विभाजित है - अमीर और गरीब! सही मायनों में आरक्षण सिर्फ गरीब के लिए होना चाहिए क्योंकि 'ग़रीबी' इस समाज की सबसे पिछड़ी जाति है! आरक्षण की संवैधानिक स्वीकृति जिस सिद्धांत पर है वो हर पिछड़े समाज को आगे लाने की व्यवस्था पर आधारित है ! मगर क्या कोई इस बात से इनकार कर सकता है की उच्च जातियों में भी कई तबके पिछड़े हैं? क्या उनको आगे लाने की ज़िम्मेदारी उस सिद्धांत से बाहर है ? आरक्षण एक व्यवस्थित सेंध है, जिसमे सबसे ज्यादा लाभ उन ढोर, पासी, कोरी और चमारो का हैं जो आर्थिक रूप से पहले ही 'ब्राह्मणहैं!

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